देश के करोड़ों घरों में रसोई का चूल्हा इन दिनों ठंडा पड़ने लगा है। LPG सिलेंडर की booking नहीं हो रही। App खुलता नहीं, IVRS line लगती नहीं, distributor का फोन नहीं उठता। और जब थककर सीधे agency पहुंचो — तो वहाँ पहले से पचास लोग खड़े मिलते हैं। घंटों की लाइन, और अंत में एक ही जवाब — “इस हफ्ते नहीं मिलेगा।”
दूसरी तरफ सरकार का बयान है : “घबराने की कोई ज़रूरत नहीं। आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है।”
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यह विरोधाभास ही इस वक्त की सबसे बड़ी खबर है।
ज़मीन पर क्या हो रहा है
दिल्ली के Lajpat Nagar से लेकर कोलकाता के Behala तक, बेंगलुरु के Rajajinagar से लेकर मुंबई के Kurla तक — हर जगह एक ही तस्वीर है। लोग सुबह सात बजे agency के बाहर आकर खड़े हो जाते हैं। दस बजे agency खुलती है। दोपहर तक पता चलता है कि stock नहीं आया।
जिस booking का काम पहले 15 मिनट में हो जाता था, वह अब तीन-चार दिन की मशक्कत के बाद भी नहीं होती। Indane, Bharat Gas और HP Gas — तीनों की digital services बुरी तरह ठप हैं। App पर “Service Unavailable” का error और IVRS पर “कृपया बाद में call करें” — बस इतना मिल रहा है।
इंतज़ार का समय जो पहले 12-15 दिन था, वह अब 25-30 दिन तक पहुंच गया है। जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, बुज़ुर्ग हैं — उनके लिए यह महज असुविधा नहीं, एक संकट है।
कहाँ से आई यह मुसीबत
इसकी जड़ें भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर हैं।
भारत अपनी LPG ज़रूरत का करीब 60 प्रतिशत import करता है। और उस import का बड़ा हिस्सा Middle East से आता है — Strait of Hormuz होकर। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इस रास्ते को अनिश्चित बना दिया है। Shipping routes बाधित हुई हैं, tankers की movement धीमी पड़ी है, और cargo insurance की लागत आसमान छू रही है।
नतीजा यह है कि समुद्र के उस पार का संकट सीधे भारतीय रसोई तक आ पहुंचा है।
इसके साथ एक और पहलू है — घरेलू स्तर पर winter के बाद demand में अचानक उछाल और कुछ राज्यों में distribution network की पुरानी कमज़ोरियाँ। यह दोनों मिलकर एक ऐसी स्थिति बना रहे हैं जिसे system झेल नहीं पा रहा।
Black Marketing का बाज़ार गर्म
जहाँ official channels बंद हैं, वहाँ unofficial रास्ते खुल गए हैं।
कई शहरों से खबरें आ रही हैं कि बाज़ार में cylinder 200 से 300 रुपये ऊपर बिक रहा है। कुछ जगहों पर distributors खुद ही “out of stock” बताकर सिलेंडर रोक रहे हैं और फिर black में बेच रहे हैं।
सरकार ने Essential Commodities Act का हवाला देते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में 7 साल तक की जेल हो सकती है। लेकिन ज़मीन पर enforcement की तस्वीर अलग है।
सरकार का रुख — आश्वासन, regulation और helplines
Petroleum Ministry ने Natural Gas Supply Regulation Order जारी किया है जिसमें घरेलू रसोई गैस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। तेल कंपनियों को निर्देश है कि industrial और commercial supply काटकर भी घरेलू उपभोक्ताओं को पहले दें।
कुछ राज्य सरकारें केंद्र पर दबाव बना रही हैं। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने Cabinet बैठक में यह मुद्दा उठाने की बात कही है। Bombay High Court ने भी Petroleum Ministry से जवाब मांगा है।
लेकिन जो आम आदमी सुबह से लाइन में खड़ा है, उसके लिए regulation order और court notices — सब बेमानी हैं। उसे चाहिए बस एक सिलेंडर।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर Middle East में तनाव और न बढ़ा तो 3-4 हफ्तों में supply normalize हो सकती है। भारत America, Norway और Russia से import बढ़ा रहा है। लंबी अवधि में Piped Natural Gas (PNG) का विस्तार और LPG पर निर्भरता घटाना ही इकलौता स्थाई हल है।
पर अभी — इस हफ्ते, इस महीने — लाखों घरों में जो सवाल है, वह बहुत सीधा है :
“खाना कैसे बनेगा?”
सरकारें आश्वासन देती रहती हैं। लाइनें लंबी होती रहती हैं। और चूल्हा ठंडा पड़ता रहता है।
अगर dealer MRP से ज़्यादा पैसे माँगे या delivery से इनकार करे, तो अपनी gas company की official helpline पर complaint दर्ज कराएं — Indane: 1800-2333-555 | Bharat Gas / HP Gas: official app या website।


